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मेरा गीत

आफ़ताबी मुस्कुराहट है माहताबी चेहरा

आफ़ताबी मुस्कुराहट है माहताबी चेहरा
चाँदनी छलकाता है तुम्हारा जिस्म सुनहरा

क्योंकर प्यार न आये नरगिसी आँखों पर
क्योंकर गुल न महकाये बहार शाखों पर

इस दीवाने को दीवानगी सिखायी किसने
दिल में उसके यह आग लगायी जिसने

आफ़ताबी मुस्कुराहट है माहताबी चेहरा
चाँदनी छलकाता है तुम्हारा जिस्म सुनहरा

किस क़ातिल अदा से तुमने तीर चलाया है
अपनी नज़रों से मेरा जिस्म महकाया है

क्योंकर शोलों पर चलने का ग़म होगा
जब तुम जैसा साथ कोई हमदम होगा

आफ़ताबी मुस्कुराहट है माहताबी चेहरा
चाँदनी छलकाता है तुम्हारा जिस्म सुनहरा

इश्क़ की मय आँखों से पिला दी है तुमने
और जन्नत की रहगुज़र पा ली है हमने

वाक़िफ़ नहीं तू मेरी मोहब्बत से जाने-जाँ
तेरे साथ जो न गुज़रा वो लम्हा’ लम्हा कहाँ

आफ़ताबी मुस्कुराहट है माहताबी चेहरा
चाँदनी छलकाता है तुम्हारा जिस्म सुनहरा


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३

By Vinay Prajapati

Vinay Prajapati 'Nazar' is a Hindi-Urdu poet who belongs to city of tahzeeb Lucknow. By profession he is a fashion technocrat and alumni of India's premier fashion institute 'NIFT'.

4 replies on “आफ़ताबी मुस्कुराहट है माहताबी चेहरा”

तुम जैसा कोई हमदम होगा तो शोलों पर चलने का गम नहीं होने वाली बात बहुत पसंद आई साहित्य में मेरी रूचि है लेकिन गहरी पैंठ नहीं है “सिर्फ़ इतना ही रिश्ता समंदर से है दूर तक हम किनारे किनारे गए” वाली बात है इसलिए सूरज जैसी मुस्कराहट वाली बात ऊपर से निकल गई और न जाने कैसे कैसे विचार आने लगे जैसे- मई जून की दोपहर जैसे सूरज की मुस्कान लिए; वे आए थे मेरे घर में स्वागत का अरमान लिए; लस्सी पिघली शरबत बिगड़ा कैसे स्वागत कर पता; अगर ठहाका मार दिया तो में वैसे ही मर जाता” में अपनी इस मुरखता के लिए माफी चाहता हूँ…

to Mr. Brij aap kya chahate hain, aafataabii muskuraahaT kaa ek pahaloo jo aap kii samajh mein aaya aur doosara wo jise maine dhyaan mein rakahte huye likha hai woh yah hai ki ‘surya kaa saundarya’… are bhai kabhii sooraj ko bhii prakriti ke saundarya mein shaamil kar lo… wah itana bhii abhaaga nahiin…. aur SHAKIRA ka naam to aapane suna hii hoga…. unhone bhii aapne ek song mein kuchh aisii baat kii aur lagabhag hamaarii kavitaayen ek hii time kii hain… aapakii kii wah ek jaise vichaar ek hii samay par do logon ke man mein aana yahaan satya ho jaatii hai, unake song kii kuchh lines de rahaa hoon…

Album: Laundry Service
Track: The One
Verse:

You’re the one I need
The way back home is always long
But if you’re close to me
I’m holding on
You’re the one I need
My real life has just begun
Cause there’s nothing like
Your smile made of sun
In a world full of strangers
You’re the one I know

jahaan tak saahitya mein aapki pakaR kii baat hai… saamaanya jeevan se juRii cheezon ko aap kaavya mein theek se joR lete hain… jaise… मई जून की दोपहर जैसे सूरज की मुस्कान लिए; वे आए थे मेरे घर में स्वागत का अरमान लिए; लस्सी पिघली शरबत बिगड़ा कैसे स्वागत कर पता; अगर ठहाका मार दिया तो में वैसे ही मर जाता”… well thanks for visiting my weblog…

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