Categories
मेरी नज़्म

यादों का सागर

यादों का सागर
गहरा है
उसमें डूब जाऊँ तो
वक़्त का हर लम्हा
ठहरा है
कोई काँटा-सा है
जो लग गया है
इक फाँस-सा है
और फँस गया है
कोई आवाज़
हमें देता नहीं
क्या वो मकान
वीराँ हो गया है
क्या शाखों पर
गुल खिलते नहीं
या हवाओं का
रुख़ बदल गया है


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००२

By Vinay Prajapati

Vinay Prajapati 'Nazar' is a Hindi-Urdu poet who belongs to city of tahzeeb Lucknow. By profession he is a fashion technocrat and alumni of India's premier fashion institute 'NIFT'.

One reply on “यादों का सागर”

Leave a Reply to Ashok Duhan Petwer 09896470222 Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *